प्रशासनिक महकमे की नाक के नीचे टिन शेड में शराब का खेल, आखिर किसके संरक्षण में हो रहा नियमों का मखौल?
शासनादेश और आबकारी विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल, शिक्षण संस्थान और प्रमुख प्रशासनिक परिसरों या संवेदनशील क्षेत्रों के निश्चित दायरे के भीतर शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकतीं। इसके बावजूद, इस स्थान पर दुकान का आवंटन और लगातार नवीनीकरण होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
प्रशासनिक नाक के नीचे टिन शेड में शराब का खेल: आखिर किसके संरक्षण में चल रहा नियमों का मखौल?
- कप्तान और डीएम आवास के चंद कदमों पर नियम ताक पर, मंदिर और स्कूल के पास धड़ल्ले से चल रही शराब की दुकान!
- वीआईपी जोन में सरेआम आबकारी नियमों की धज्जियां, जिम्मेदार विभाग बने अनजान।
- सुरक्षा और कानून के गढ़ में ही अवैध कारोबार: क्या प्रशासन को नहीं दिखती टिन शेड के नीचे चल रही यह दुकान?
- मंदिर और शिक्षा मंदिर के सामने शराब का कारोबार: आखिर कब जागेगा आबकारी विभाग और जिला प्रशासन?
- नियम-कानून सिर्फ आम जनता के लिए? प्रशासनिक परिसरों के पास चल रही दुकान पर उठ रहे बड़े सवाल।
बस्ती: विकास और कानून-व्यवस्था के दावे करने वाले प्रशासनिक महकमों की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। जनपद के सबसे संवेदनशील और वीआईपी प्रशासनिक क्षेत्र में—जहाँ पुलिस कप्तान (कप्तान आवास) का पहरा है, जिलाधिकारी का आवास है, सर्किट हाउस है और कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय स्थित हैं—वहीं से चंद कदमों की दूरी पर नियमों को ताक पर रखकर एक शराब की दुकान संचालित हो रही है।
सबसे विडंबना यह है कि इस दुकान के पास ही अमहट शिव मंदिर और एक शिक्षण संस्थान (शिक्षा मंदिर) भी मौजूद है। इसके बावजूद, वर्षों से एक साधारण टिन शेड के नीचे यह कारोबार बेखौफ चल रहा है। यह स्थिति न सिर्फ आबकारी नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि स्थानीय नागरिकों की आस्था और बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
आबकारी नीति और प्रशासनिक नैतिकता पर गंभीर सवाल
शासनादेश और आबकारी विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी धार्मिक स्थल, शिक्षण संस्थान और प्रमुख प्रशासनिक परिसरों या संवेदनशील क्षेत्रों के निश्चित दायरे के भीतर शराब की दुकानें नहीं खोली जा सकतीं। इसके बावजूद, इस स्थान पर दुकान का आवंटन और लगातार नवीनीकरण होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- मानक किसके इशारे पर बदले?: आबकारी विभाग ने किस आधार पर इस स्थान का चयन किया और नियमों को ताक पर रखकर इसका नवीनीकरण कैसे कर दिया?
- प्रशासन की आँखों पर पट्टी?: जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक आवास के ठीक सामने यह सब चल रहा है, फिर भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई अनापत्ति या रोकटोक क्यों नहीं की गई?
- दूरी के मानकों की अनदेखी: क्या मंदिर और स्कूल से इस दुकान की दूरी के तय मानकों की कागजों में धांधली कर ली गई है, या फिर सांठगांठ से सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा है?
नागरिकों का आक्रोश और चेतावनी
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में इस बात को लेकर भारी रोष है। जनता का सवाल है कि जब आम आदमी के लिए कानून के डंडे सख्त होते हैं, तो इन शराब माफियाओं या दुकान संचालकों के लिए नियम इतने लचीले क्यों हो जाते हैं?
जनता की स्पष्ट मांग है कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग तुरंत नींद से जागे, संयुक्त रूप से स्थलीय जांच करे और यदि मानक पूरे नहीं होते हैं, तो इस दुकान को तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
यदि जिम्मेदार विभागों ने जल्द ही इस पर आंखें नहीं खोलीं, तो यह मामला जनता के बीच प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक बड़ा दाग बनकर रह जाएगा।
— अजीत मिश्रा (खोजी), बस्ती











